मिरे यार यार तेरा तिरे इंतिज़ार में है
यूँ ही दिन गुज़रते मेरे मिरा दिल जो प्यार में है
इसे फेंक दे या इस को कहीं रख ले तू छिपा कर
ऐ मता-ए-जाँ मिरा दिल तिरे इख़्तियार में है
ये बता दो नस्ल-ए-नौ को जो हैं इश्क़-ओ-आशिक़ी में
कभी लुत्फ़ ग़ुफ्त-ओ-गू में कभी दर-किनार में है
तू मता-ए-दिल है दिल की मलिका तुझे बनाया
अभी इतनी बादशाही तिरे ख़ाकसार में है
— 'June' Sahab Barelvi















