यूँँ तो वो बे-हुनर था पर बा-कमाल बाँधे
क्या ख़ूब उस ने अपने सर के थे बाल बाँधे
जब वो हसीन लड़की पहलू में आके बैठी
तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे
रखता हूँ अपने दिल में उस को मैं ऐसे गोया
फिरता हूँ साथ अपने इक यर्ग़माल बाँधे
तरही ग़ज़ल सुनाने आए थे 'जून' साहब
की ख़ूब शेर-गोई लफ़्ज़ों के जाल बाँधे
— 'June' Sahab Barelvi















