यूँॅं ही गुनगुनाने को जी चाहता है
सुनो कुछ सुनाने को जी चाहता है
मिरा हाल-अहवाल पूछो तो जानाँ
तुम्हें सब बताने को जी चाहता है
जहाँ आ के बैठे वो पहलू-ब-पहलू
वहाँ से न जाने को जी चाहता है
जहाँ मय-कदे का कोई बाब देखूॅं
वहीं लड़खड़ाने को जी चाहता है
तिरा देख यूँॅं ज़ेर-ए-लब-मुस्कुराना
मिरा मुस्कुराने को जी चाहता है
जो कर ली मुहब्बत तो कैसी नदामत
मिरा सब गँवाने को जी चाहता है
— 'June' Sahab Barelvi















