कैफ़ियत ऐसी है कोई राज़दॉं मेरा नहीं
मैं अकेला हूँ यहॉं ये कारवॉं मेरा नहीं
सूरत-ए-हाल-ए-बयॉं कैसे करूँॅं मैं दोस्तों
हम-नशीं तो है वो लेकिन हम-नवॉं मेरा नहीं
ज़िक्र मेरा रात-दिन करते रहे जो कल-तलक
लब पे उनके आज-कल नाम-ओ-निशॉं मेरा नहीं
दिल मिरा पैरों तले रखती हो क्यूँँॅं तुम जान-ए-मन
दिल मिरा मासूम है दिल राएगॉं मेरा नहीं
बाग़बानी ज़ख़्मों की करके गया ऐसे वो जू'न
ज़ख़्म तो मेरे हैं लेकिन बाग़बॉं मेरा नहीं
Read Full