वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को

कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को

नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना
कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को

वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या
हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को

वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो
जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को

अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर
अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को

उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे
मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को

पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ
कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को

ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब
भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

— Naseer Turabi

More by Naseer Turabi

Other ghazal from the same pen

See all from Naseer Turabi →

Pollution Shayari

Shers of pollution.

All Pollution Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling