कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला
चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला
मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से
मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला
वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है
मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला
मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे
और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला
— Tehzeeb Hafi















