Atul Singh
December 21, 2023

बहर #1 हज़ज मुसम्मन सालिम
इस Blog में हम जिस बहर को detail में जानेंगे उसका नाम है "हज़ज मुसम्मन सालिम"। डरिए मत! ये नाम याद रखने की आपको ज़रूरत नहीं है। अगर आप उर्दू ग़ज़लें लिखते हैं तो मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि आप सभी ने इस बहर में ग़ज़ल व शेर ज़रूर लिखे होंगे।
Atul Singh
December 23, 2023

बहर #2 बहर-ए-ख़फ़ीफ मुसद्दस मख़बून अबतर
आज की क्लास में हम जिस बहर को बारीकी से जानेंगे उसका नाम है "ख़फ़ीफ मुसद्दस मख़बून अबतर"। आप सोच रहे होंगे यह कैसा अजीब नाम है और कितना भयावह है।यक़ीन मानिए आप जब इसका रुक्न रूप देखेंगे तो आपको यह बहर सबसे आसान लगेगी।चलिए फिर अब हम इस बहर का रुक्न रूप देखते हैं।
Atul Singh
December 17, 2022

बहर #3 कामिल मुसम्मन सालिम
आज की क्लास में हम जिस बहर को बारीकी से जानेंगे उसका नाम है कामिल मुसम्मन सालिम। इस बहर का नाम जितना आसान है, लिखना भी उतना ही आसान।इसी के साथ आज हम आपको बहर के nomenclature के नियम से भी रू-ब-रू कराएँगे।
Adnan Ali SHAGAF
December 28, 2022

बहर #4 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन मक़बूज़ मख़बून मक़तू'अ
अभी तक के ब्लॉग में हमने जिन बहरों के बारे में बात की थी उनमें एक मुरक्कब मुज़ाहिफ़ बहर भी थी।सो आज की क्लास में भी हम जिस बहर की बारीक-बीनी से छानपटक कर रहे होंगे वो भी एक मुरक्कब मुज़ाहिफ़ बहर है। जिसका नाम बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन मक़बूज़ मख़बून मक़तू'अ है।
Adnan Ali SHAGAF
January 21, 2023

बहर #5 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब
आज का ब्लॉग काफ़ी इंटरेस्टिंग होने वाला है क्योंकि आज जिस बहर पर हम क्लास करेंगे उसमें nomenclature का part बहुत कम है साथ ही साथ वक़्फ़ा (यति/stoppage) और शिकस्त-ए-नारवा जैसी चीज़ों को जानेंगे जो इस बहर में लिखते समय ज़रूरी हैं।
Atul Singh
March 6, 2023

बहर #6 बहर-ए-मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
आज के Blog में हम जिस बहर को detail में जानेंगे उसका नाम "मुज़ारे'अ मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़" है। यह काफ़ी लोकप्रिय बहर है, इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस बहर में बॉलीवुड इंडस्ट्री की फ़िल्मों में बहुत से गीत लिखे गए हैं जो आमजन की ज़ुबान पर दशकों तक छाए रहे।
Atul Singh
April 30, 2023

बहर #7 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसद्दस सालिम
इस ब्लॉग में आप जानेंगे उर्दू शायरी की छोटी बहरों में से एक बहर-ए-मुतक़ारिब मुसद्दस सालिम के बारे में,आइए जानते हैं इस छोटी बहर के बड़े से नाम और इस पर लिखी गयी ग़ज़लों के बारे में।
Adnan Ali SHAGAF
October 10, 2023

बहर #8 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम
"अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो" मोहम्मद रफ़ी साहब का ये गाना तो आपने सुना ही होगा। क्या आप जानते हैं कि ये गाना भी बहर में है? और जिस बहर में है वो उर्दू शायरी की सबसे आसान और ख़ूब इस्तेमाल की जाने वाली बहरों में से एक है। बहर सीरीज़ के इस आठवें ब्लॉग में हम बात करने जा रहे हैं इसी गाने की बहर बहर-ए-मुतक़ा
Adnan Ali SHAGAF
October 18, 2023

बहर #9 बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन महज़ूफ़
आज हम हाज़िर हैं बहर सीरीज़ के नौवें ब्लॉग के साथ,पिछले ब्लॉग की बहर से मिलती हुई इस बहर का नाम है बहर-ए-मुतक़ारिब मुसम्मन महज़ूफ़। पिछली बहर की तरह ये बहर भी उर्दू शायरी में ख़ूब इस्तेमाल की गई है,कईं ख़ूबसूरत गाने और ग़ज़लें इसी बहर पर लिखी गयी हैं। आप भी इस ब्लॉग के माध्यम से इस बहर की बारीकियों को जान