Meaning of

अकड़

akad • اکڑ

गर्व; अहंकार; अकड़

pride; arrogance; stiffness

غرور; تکبر; اکڑ

Hindi

उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी — Zubair Ali Tabish
मेरा हाथ पकड़ ले पागल, जंगल है जितना भी रौशन हो जंगल, जंगल है — Umair Najmi
सर पकड़ कर डिग्रियों को देखता है नौजवाँ मुल्क में इस वक़्त बेकारी बहुत मशहूर है — nakul kumar
रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब — Sandeep Thakur
उस के हाथ में बाक़ी क्या रह जाता है तुम ने जिस का हाथ पकड़ कर छोड़ दिया — Vashu Pandey
दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया — Zubair Ali Tabish

अकड़ एक कठोर गर्व की भावना को व्यक्त करता है, एक ऐसा रुख जो झुकने या समर्पण करने से इंकार करता है। कविता में, यह अक्सर आत्म-विश्वास और उसके नीचे छिपी असुरक्षा के बीच के आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है।

कवि अकड़ का उपयोग गर्व और पतन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह किसी पात्र की जिद या अनियंत्रित अहंकार के दुखद परिणामों को चित्रित कर सकता है।

अकड़ हमें आत्मविश्वास और अहंकार के बीच की महीन रेखा की याद दिलाता है, एक संतुलन जो मानव चरित्र को परिभाषित करता है।