Meaning of

अमृत

amrit • امرت

अमृत; अमरत्व

nectar; immortality

امرت; امر

Sanskrit

जो न खेली होली 'अमृत' के साथ में हाथों में दीवाली तक गुलाल रहेगा — Amritanshu Sharma
ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में — Anjum Ludhianvi
अलावा शिव के विष कोई नहीं पीता सभी अमृत के प्यासे देव या दानव — "Dharam" Barot
किसी साहिर को मैं भी चाहती हूँ मेरे अंदर भी कोई अमृता है — Shruti chhaya
तुम मेरे वो लगते हो जो कोई नइँ हो गई मैं अमृता सी प्यार में — Neeraj Neer
अमृता इमरोज़ साहिर सब कहानी है मुसाफ़िर तुम बताओ कौन चाहत में फ़ना करता है ख़ुद को — Gaurav Singh
दश्त में है इक ग़ज़ाला अमृता जैसी जिस की दुनिया का मुझे इमरोज़ होना है — Intzar Akhtar

अमृत, अपने सार में, वह दिव्य रस है जो अमरत्व प्रदान करता है। कविता में, यह शाश्वत जीवन, पवित्रता और परम आनंद का प्रतीक है। यह वह अमृत है जिसे कवि अपनी कविताओं की गहराई में खोजते हैं, एक ऐसा रूपक जो अप्राप्य होते हुए भी गहराई से वांछित है।

कवि अक्सर 'अमृत' का उपयोग शाश्वत प्रेम, दिव्य सुंदरता और आध्यात्मिक ज्ञान की खोज के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के विपरीत होता है, कुछ शाश्वत के लिए लालसा को उजागर करता है।

अमृत अमरत्व और पवित्रता की शाश्वत खोज का प्रतीक है। यह मानव आत्मा में निवास करने वाली दिव्य आकांक्षाओं की याद दिलाता है।