Meaning of

अर्घ

argh • ارغ

अर्घ्य; भेंट

libation; offering

ارغ; نذر

Sanskrit

ज़ख़्म क्या होगा जहाँ में और कोई दूसरा बाप के शाने अगर मरघट को बेटा चल पड़े — Ravi 'VEER'
अब मुझे फ़ारिग़ करो तुम अपनी यादों से कोई आया है मेरा बनने मेरे घर में — Amaan Javed
मौत के बा'द भी ज़ात न पीछा छोड़ेगी इन सबने मरघट भी अलग बनाए हैं — Shamsher 'Sahil'
तिरे ये आशिक़ों की भीड़ से है शहर में रौनक़ नहीं तो शहर की क़िस्मत में सन्नाटा है मरघट का — arjun chamoli
बता दी दिल की सभी बातें उस को मैं ने आज मैं मरघटे से हूँ लौटा अज़ान देते हुए — Raj
फ़ारिग़ नहीं लेकिन तुझे दिल ने मिरे ख़्वाबों ख़यालों में सजा रक्खा सदा — Vinod Ganeshpure

अपने मूल अर्थ में, 'अर्घ' एक पवित्र अर्पण का संकेत करता है, जो श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। कविता में, यह अपने धार्मिक मूल से आगे बढ़कर आत्मसमर्पण और प्रेम का रूपक बन जाता है।

'अर्घ' का प्रयोग कवि अक्सर किसी की भक्ति की गहराई को दर्शाने के लिए करते हैं। यह किसी प्रिय या उच्च शक्ति के प्रति आत्मसमर्पण का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द पवित्र अनुष्ठानों की छवि को उभारता है, जिससे कविता की भावनात्मक गहराई बढ़ जाती है।

कविता के क्षेत्र में, 'अर्घ' गहन भक्ति और बलिदान को व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है। यह देने और पाने के शाश्वत नृत्य के साथ गूंजता है।