Meaning of

अश्क़-ओ-ख़ून

ashq-o-khoon • اشک و خون

आँसू और खून

tears and blood

اشک و خون

Persian

अश्क़-ओ-ख़ून घुलते हैं तब दीदा-ए-तर बनती है दास्तान इश्क़ में मरने से अमर बनती है — Jaani Lakhnavi
सब दिए बुझ गए और इन आँखों में अश्क़-ओ-ख़ूँ तो भरा है प घी ही नहीं — Akhil Saxena

'अश्क़-ओ-ख़ून' वाक्यांश गहन दुःख और बलिदान की एक जीवंत छवि उत्पन्न करता है, जहाँ आँसू और खून गहरी भावनात्मक और शारीरिक पीड़ा के प्रतीक बन जाते हैं। कविता में, यह अक्सर दुःख की अंतिम अभिव्यक्ति और गहरे प्रेम या हानि की कीमत का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि 'अश्क़-ओ-ख़ून' का उपयोग निराशा की गहराई और प्रेम के नाम पर किए गए बलिदानों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह आनंद और पीड़ा, जीवन और मृत्यु के बीच के मार्मिक अंतर को चित्रित कर सकता है।

काव्यात्मक अभिव्यक्ति के क्षेत्र में, 'अश्क़-ओ-ख़ून' प्रेम और हानि की स्थायी शक्ति का प्रमाण बन जाता है।