Meaning of

आतिश-ए-ग़म

aatish-e-gham • آتش غم

दुःख की आग; जलता हुआ शोक

fire of sorrow; burning grief

غم کی آگ; جلتا ہوا دکھ

Persian

आतिश-ए-ग़म मेरे सीने कि बढ़ाने आए उस से कह दो कि मुझे छोड़ के जाने आए — Rashid barabankvi
आतिश-ए-ग़म से न जल जाए कहीं रूह फ़ौलाद किए जाते है — Nilesh Barai
रोज़ भुनती है आतिश-ए-ग़म पर रूह अपनी कबाब की सी है — Ajeetendra Aazi Tamaam

‘आतिश-ए-ग़म’ वाक्यांश दुःख की तीव्र और भस्म करने वाली प्रकृति को दर्शाता है। यह एक ऐसे शोक का संकेत देता है जो इतना गहरा है कि आग की तरह जलता है, आत्मा पर अमिट छाप छोड़ता है। कविता में, यह अक्सर मानवीय पीड़ा की गहराई और दर्द की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक होता है।

कवि ‘आतिश-ए-ग़म’ का उपयोग गहरे दुःख और हानि को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह शोक की भस्म करने वाली प्रकृति और जिस तरह से यह दिल को पुनः आकार देता है, को चित्रित कर सकता है। अक्सर, यह उन परीक्षाओं के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है जो मानव आत्मा को परिष्कृत करती हैं।

दुःख की लपटों में, ‘आतिश-ए-ग़म’ मानव हृदय की दृढ़ता को प्रकट करता है।