Meaning of

आफ़्ताब

aftaab • آفتاب

सूरज; धूप; चमक

sun; sunlight; radiance

آفتاب; دھوپ; چمک

Persian

न देता आफ़्ताबों में दिखाई, अब क्या बोलें
हमारी जान को ना दे सुनाई, अब क्या बोलें

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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब
हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया

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ज़माना चाहे जो आज कर ले नहीं रुकेंगे क़दम हमारे
जिस आग से आफ़ताब रौशन वो आग दिल में धधक रही है

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वो अपने चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं
इसीलिए तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं

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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब
हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया

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जिस को बड़ा ग़ुरूर था अपने वजूद पर
वो आफ़ताब शाम की चौखट पे मर गया

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चाँद ला सका नहीं कभी सनम है सच मगर
ला रहा हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर आफ़ताब अब

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सुबह-सुबह ये आफ़ताब कौन लाया है
बड़ी मशक़्क़तों से चाँद को सुलाया है

धुआँ सा उठ रहा है कब से मेरी आँखों में
बुझा दे जिस किसी ने दिल मेरा जलाया है

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याद में तेरी खो कर हम ग़ज़ल बनाते हैं
आफ़ताब ढ़लता है जब ये शाम होती है

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लिफ़ाफ़ा अपनी यादों का खुला छोड़ो
फ़िदाई जी रहा, ख़त के सहारे से

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न देता आफ़्ताबों में दिखाई, अब क्या बोलें
हमारी जान को ना दे सुनाई, अब क्या बोलें

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वो आफ़ताब लाने का देकर हमें फ़रेब
हम सेे हमारी रात के जुगनू भी ले गया

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'आफ़्ताब' शब्द सूरज की पूरी महिमा को सामने लाता है, जो जीवन, गर्मी और चमक का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर प्रेम या सत्य की प्रकाशमय शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है, जो छायाओं को दूर करता है और स्पष्टता लाता है।

कवि 'आफ़्ताब' का उपयोग ज्ञान और आशा का प्रतीक बनाने के लिए करते हैं। यह उन पंक्तियों में प्रकट होता है जो नई शुरुआत, प्रेमी की दृष्टि की गर्मी, या समझ की सुबह की बात करती हैं।

काव्यिक क्षेत्र में, 'आफ़्ताब' आशा और स्पष्टता का प्रकाशस्तंभ बनकर चमकता है, भीतर के अंधकार को दूर करता है।