Meaning of

आब-रू

aab-roo • آبرو

सम्मान; प्रतिष्ठा; गरिमा

honor; dignity; prestige

عزت; وقار; شان

Persian

चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़' दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे — Ahmad Faraz
चमन में जब भी गुलाब को हम निगाह-ए-उल्फ़त से देखते हैं तो ख़ार सारे हमारी जानिब निगाह-ए-नफ़रत से देखते हैं — Shajar Abbas
लाज़मी हो आबरू-ए-इश्क़ ऐसा हो क़रीना काश क़दमों में मैं सर रख सकता सुल्तान-ए-मदीना — Kanz Al Rida
अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू-ए-शौक़ दम घुट रहा है वक़्त की रफ़्तार देख कर — Bismil Azimabadi
हाँ 'इज़्ज़त-आबरू की तेरे शामत आने वाली है किए पर दीन की तेरे बग़ावत आने वाली है — Jagat Singh
इज़्ज़त-ओ-आबरू के डर से फिर इक वालिद ने अपनी बेटी की मोहब्बत का गला घोंट दिया — Dipendra Singh 'Raaz'

आब-रू व्यक्ति की गरिमा और सम्मान का प्रतीक है, जो व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। कविता में, यह आत्म-सम्मान और सामाजिक दृष्टिकोण के बीच के नाजुक संतुलन को उभारता है।

कवि अक्सर आब-रू का उपयोग व्यक्तिगत अखंडता और सामाजिक निर्णय के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह व्यक्ति की आंतरिक शक्ति का माप हो सकता है या बाहरी ताकतों के प्रति संवेदनशील एक नाजुक मुखौटा।

आब-रू आत्मा का मूक संरक्षक है, सम्मान की निरंतर खोज का प्रमाण।