Meaning of

इन्तेक़ाम

inteqaam • انتقام

बदला; प्रतिशोध

revenge; retribution

بدلہ; انتقام

Arabic

अरे मैं इंतिक़ामन रो रहा हूँ
मैं चुप हो जाऊँगा उस को रुला के

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हमारी आख़िरी सिगरेट थी ये अरे दुनिया
जो तुझ पे ग़ुस्से में हम ने अभी जला ली है

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हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे!

मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!

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कोई तुम सा भी काश तुम को मिले
मुद्दआ' हम को इंतिक़ाम से है

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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तू समझता है कि रिश्तों कि दुहाई देंगे
अरे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे

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हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर ने गिर के परिंदों से इन्तेक़ाम लिया

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हम पे कर ध्यान अरे चाँद को तकने वाले
चाँद के पास तो मोहलत है सहर होने तक

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हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है

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अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं

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अरे मैं इंतिक़ामन रो रहा हूँ
मैं चुप हो जाऊँगा उस को रुला के

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हमारी आख़िरी सिगरेट थी ये अरे दुनिया
जो तुझ पे ग़ुस्से में हम ने अभी जला ली है

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अपने मूल अर्थ में, 'इन्तेक़ाम' एक गहरे, जलते हुए इच्छा को व्यक्त करता है, जो किसी अन्याय को सही करने की चाह रखता है। कविता में यह अक्सर एक महान, लगभग महानुभाविक खोज के रूप में उभरता है, जहाँ व्यक्तिगत और सार्वभौमिक आपस में मिलते हैं।

कवि अक्सर 'इन्तेक़ाम' का उपयोग न्याय और नैतिक संतुलन के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह एक चरित्र के आंतरिक संघर्ष या समाज की निष्पक्षता की खोज का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'इन्तेक़ाम' मानव भावनाओं और न्याय की जटिलताओं को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।