Meaning of

कोह

koh • کوہ

पर्वत; शिखर

mountain; peak

کوہ; چوٹی

Persian

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है — Jaun Elia
दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते अब कोई शिकवा हम नहीं करते — Jaun Elia
कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से — Waseem Barelvi
इक गुल के मुरझाने पर क्या गुलशन में कोहराम मचा इक चेहरा कुम्हला जाने से कितने दिल नाशाद हुए — Faiz Ahmad Faiz
'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया — Shaad Arfi
वैसे एक शिकवा था तुम सेे अच्छा छोडो ईद मुबारक — Zubair Ali Tabish
देखा न कोहकन कोई फ़रहाद के बग़ैर आता नहीं है फ़न कोई उस्ताद के बग़ैर — Unknown
बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं — Shariq Kaifi
अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर' एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे — Majeed Akhtar
पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा — Rais Amrohvi

'कोह' पर्वतों की भव्यता और महानता को दर्शाता है, स्थायित्व और ऊँचाई के प्रतीक। कविता में, यह अक्सर ऊँचे लक्ष्यों या मानव आत्मा द्वारा सामना की गई दुर्गम चुनौतियों का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि 'कोह' का उपयोग महत्वाकांक्षा और सहनशक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं, प्रकृति की विशालता को मानव सीमाओं के विपरीत रखते हुए।

कविता में, 'कोह' एक स्मारक के रूप में खड़ा है जो स्थायी आत्मा और उन ऊँचाइयों का प्रतीक है जिन्हें वह जीतना चाहता है।