Meaning of

ख़ोशा

khosha • خوشہ

गुच्छा; झुंड; अनाज की बाल

cluster; bunch; ear of grain

گچھا; جھرمٹ; اناج کی بالی

Persian

जिस खेत से दहक़ाँ को मुयस्सर नहीं रोज़ी उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो — Allama Iqbal

'ख़ोशा' मूल रूप से फूलों या अनाज के गुच्छे को संदर्भित करता है। कविता में, यह प्रचुरता और एकता की छवि को उभारता है, जहाँ व्यक्तिगत तत्व मिलकर एक सामंजस्यपूर्ण संपूर्ण बनाते हैं।

'ख़ोशा' का उपयोग कवि अक्सर सामूहिक सामंजस्य की सुंदरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह भावनाओं या विचारों के समूह का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जो प्रत्येक अलग होते हुए भी एक बड़े एकता का हिस्सा होते हैं।

कविता में, 'ख़ोशा' हमें एकता में मिलने वाली शक्ति की याद दिलाता है। यह एक साथ होने की सुंदरता की ओर एक कोमल संकेत है।