Meaning of

ख़ोशा-ए-गंदुम

khosha-e-gandum • خوشہ گندم

गेहूँ की बाल; फसल का प्रतीक

ear of wheat; symbol of harvest

گندم کی بالی; فصل کی علامت

Persian

जिस खेत से दहक़ाँ को मुयस्सर नहीं रोज़ी उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो — Allama Iqbal

'ख़ोशा-ए-गंदुम' समृद्धि और परिपूर्णता का एक जीवंत प्रतीक है। अपने शाब्दिक अर्थ में, यह गेहूँ की बाल को संदर्भित करता है, जो विकास और पोषण का चरम है। कविता में, यह जीवन की समृद्धि, धैर्य के पुरस्कार और प्रकृति के चक्रों की सुंदरता को दर्शाता है।

कवि 'ख़ोशा-ए-गंदुम' का उपयोग समृद्धि, श्रम के फल, और जीवन के चक्रीय स्वभाव के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह आशा और भविष्य की फसलों के वादे का प्रतीक हो सकता है, जो बंजरता या कमी के विपरीत है।

'ख़ोशा-ए-गंदुम' में, कवि जीवन के भरपूर चक्रों का प्रमाण पाता है।