Meaning of
ख़ौफ़-ए-रुस्वाई
khof-e-ruswaai • خوف رسوائی
Hindi
अपमान का भय; बेइज़्ज़ती का डर
English
fear of disgrace; dread of humiliation
Urdu
ذلت کا خوف; رسوائی کا ڈر
Origin
Persian
Nuance
‘ख़ौफ़-ए-रुस्वाई’ का मूल भाव समाज में अपनी प्रतिष्ठा खोने के गहरे भय से जुड़ा है। कविता में, यह भय अक्सर बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है, जो मानव आत्मा की आंतरिक उथल-पुथल और असुरक्षा को दर्शाता है।
Poetic Usage
कवि ‘ख़ौफ़-ए-रुस्वाई’ का उपयोग व्यक्तिगत और सामाजिक संघर्ष के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रेम की कविताओं में दिखाई देता है, जहाँ सार्वजनिक शर्म का भय निजी जुनून के विपरीत होता है। यह सामाजिक दबावों और व्यक्तिगत ईमानदारी के संघर्ष को भी दर्शा सकता है।
Closing Insight
गरिमा और इच्छा के नृत्य में, ‘ख़ौफ़-ए-रुस्वाई’ हमारे गहरे भय की एक मार्मिक याद दिलाता है।