Meaning of

खिजांँ

khijaan • خزاں

पतझड़; पतन; क्षय

autumn; decline; decay

خزاں; زوال; انحطاط

Persian

बन कर कभी बहार तो बन कर कभी ख़िज़ाँ आबाद कर गए कभी बर्बाद कर गए — Ramnath Shodharthi
इतने बे-रंग भी नहीं हैं हम गर ये दौर-ए-ख़िज़ाँ गुज़र जाए — shampa andaliib
बड़ा मुश्किल है, मुश्किल में, तेरे हक़ में सदा देगी ख़िजाँ में हर बचे पत्ते को ये दुनिया हवा देगी — Arihant jain
ये हम जो औरों के दुख का ठेका लिए हुए हैं किसी ने इस का मआल पूछा तो क्या कहेंगे — Kabir Athar

अपने मूल अर्थ में, 'खिजांँ' पतझड़ की छवि को उभारता है, एक ऐसा मौसम जो पत्तों के झड़ने और एक धीमे पतन से चिह्नित होता है। कविता में, यह शब्द न केवल भौतिक क्षय बल्कि समय के साथ आने वाले भावनात्मक और आध्यात्मिक परिवर्तनों का प्रतीक बन जाता है।

'खिजांँ' का उपयोग कवि अक्सर जीवन के अनिवार्य पतन पर विचार करने के लिए करते हैं। यह खोई हुई जवानी के लिए उदासी या अधूरे सपनों की उदासी को उभार सकता है। यह शब्द वसंत के साथ विपरीत है, जो नवीनीकरण का प्रतीक है, इस प्रकार अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति को उजागर करता है।

खिजांँ पतन में सुंदरता को पकड़ता है, यह याद दिलाता है कि हर अंत में एक नई शुरुआत का बीज होता है।