Meaning of

जश्ने

jashne • جشن

उत्सव; पर्व

celebration; festivity

تقریب; جشن

Persian

महफ़िल में तेरी यूँँ ही रहे जश्न-ए-चरागाँ आँखों में ही ये रात गुज़र जाए तो अच्छा — Sahir Ludhianvi
दुल्हन बनी हुई हैं राहें जश्न मनाओ साल-ए-नौ के — Sahir Ludhianvi
कर दिया क़ुर्बान इक ख़्वाहिश मियाँ दुश्मन-ए-जाँ अब मनाओ जश्न तुम — Shubham Rai 'shubh'
ख़बर मेरे चले जाने की सब को मिल गई होगी किसी का जश्न होगा अब कोई मातम मनायेगा — Harshwardhan Aurangabadi
जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं — Ritesh Rajwada
फिर इस के बा'द मनाया न जश्न ख़ुश्बू का लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते — Azhar Iqbal
किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग — Imam Bakhsh Nasikh
कि इक ईंट औ गिर गई ज़िन्दगी की नए साल के जश्न में डूबे हैं सब — Irshad Siddique "Shibu"
ये आज़ादी का कैसा जश्न है भारत जहाँ बच्चे तिरे भूखे सो जाते हैं — Bhoomi Srivastava

मूल रूप से 'जश्ने' शब्द हर्ष और सामूहिकता का प्रतीक है, जब दिल हल्के होते हैं और आत्माएं ऊँची होती हैं। कविता में इस शब्द ने न केवल उत्सव के भौतिक कार्य को बल्कि आंतरिक उल्लास और क्षणिक सुख को भी व्यक्त किया है।

कवि अक्सर 'जश्ने' का उपयोग जीवंत समारोहों के दृश्य चित्रित करने के लिए करते हैं। यह खुशी की क्षणभंगुरता का प्रतीक हो सकता है। यह एकांत के विपरीत, एकजुटता की गर्मजोशी को उजागर करता है।

कविता में, 'जश्ने' जीवन की क्षणिक खुशियों का रूपक बन जाता है, साझा क्षणों की सुंदरता की याद दिलाता है।