Meaning of

जस्त

jast • جست

उछाल; छलांग; अचानक गति

leap; jump; sudden movement

اچھال; چھلانگ; اچانک حرکت

Persian

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही — Faiz Ahmad Faiz
ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ — Jaun Elia
पा सकेंगे न उम्र भर जिस को जुस्तुजू आज भी उसी की है — Habib Jalib
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका — Arzoo Lakhnavi
तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी ख़ुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तुजू करे — Ahmad Faraz
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है — Mirza Ghalib
नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही — Faiz Ahmad Faiz
तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे — Jameel Malik
मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू — Muzammil Raza
नहीं नहीं हमें अब तेरी जुस्तुजू भी नहीं तुझे भी भूल गए हम तिरी ख़ुशी के लिए — Zehra Nigaah

अपने मूल अर्थ में, 'जस्त' एक अचानक, ऊर्जावान गति का सार प्रस्तुत करता है। कविता ने इस शब्द को न केवल शारीरिक छलांगों के लिए बल्कि विश्वास की छलांगों, साहस के क्षणों और उन भावनात्मक उछालों के लिए भी अपनाया है जो हमें आगे बढ़ाते हैं।

'जस्त' का उपयोग कवि अक्सर परिवर्तन या रहस्योद्घाटन के क्षणों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह साधारण से अलगाव, अचानक अंतर्दृष्टि, या परिवर्तन को अपनाने के साहस को दर्शा सकता है।

कविता में, 'जस्त' साहस और परिवर्तन की भावना को समाहित करता है। यह हमें छलांग लगाने की शक्ति की याद दिलाता है, चाहे वह शाब्दिक हो या रूपक।