Meaning of

जुस्तजू

justajoo • جستجو

खोज; तलाश; अनुसंधान

search; quest; pursuit

تلاش; جستجو; کھوج

Persian

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही — Faiz Ahmad Faiz
ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ — Jaun Elia
पा सकेंगे न उम्र भर जिस को जुस्तुजू आज भी उसी की है — Habib Jalib
बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका — Arzoo Lakhnavi
तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी ख़ुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तुजू करे — Ahmad Faraz
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है — Mirza Ghalib
नहीं निगाह में मंज़िल, तो जुस्तजू ही सही नहीं विसाल मुयस्सर तो आरज़ू ही सही — Faiz Ahmad Faiz
तिरी जुस्तुजू में निकले तो अजब सराब देखे कभी शब को दिन कहा है कभी दिन में ख़्वाब देखे — Jameel Malik
मरने का है ख़याल ना जीने की आरज़ू बस है मुझे तो वस्ल के मौसम की जुस्तजू — Muzammil Raza
वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ — Noon Meem Rashid

मूल रूप से, 'जुस्तजू' एक खोज या तलाश को दर्शाता है, जो अक्सर आंतरिक लालसा या इच्छा से प्रेरित होती है। कविता में, यह शारीरिक खोज से परे जाकर आत्मा की अर्थ, प्रेम, या सत्य की खोज को दर्शाता है, जो एक अनंत यात्रा को प्रतिबिंबित करता है।

कवि 'जुस्तजू' का उपयोग आदर्शों या सपनों की अथक खोज को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसी यात्रा का सार पकड़ता है जिसका कोई निश्चित गंतव्य नहीं होता, जहाँ खोज की क्रिया ही संतोष का स्रोत बन जाती है।

'जुस्तजू' में, यात्रा ही गंतव्य है। यह इच्छा और खोज का नृत्य है।