Meaning of

तल्ख़

talkh • تلخ

कड़वा; कठोर

bitter; harsh

تلخ; سخت

Persian

लहजा ही थोड़ा तल्ख़ है दुनिया के सामने वैसे तो ठीक ठाक हूँ मैं बोल-चाल में — Ankit Maurya
तदबीर के दस्त-ए-रंगीं से तक़दीर दरख़्शाँ होती है क़ुदरत भी मदद फ़रमाती है जब कोशिश-ए-इंसाँ होती है — Hafeez Banarasi
कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है — Hafeez Banarasi
तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं — Kaleem Aajiz
तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ — Sada Ambalvi
तल्ख़ फब्तियाँ तीखी बातें उस पर तंज़ भरे अश'आर उन के लब हरकत में आए शहद घुल गया कानों में — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
कितनी कड़वी हैं बातें भी इस दुनिया की यारों अब ज़िंदगी मेरी ही मुझ को तल्ख़-नवा लगती है — ALI ZUHRI
एक ये भी तल्ख़ सच है ज़िंदगी का मेरे दोस्त शख़्स कोई सिर्फ़ मेरा तो कभी होता नहीं — AMAN RAJ SINHA

तल्ख़ का मूल अर्थ है कड़वाहट, चाहे वह स्वाद में हो या अनुभव में। कविता में, यह अक्सर जीवन की कठोर वास्तविकताओं, अधूरी इच्छाओं के दर्द और खोए हुए प्रेम के दुख का प्रतीक होता है।

कवि अक्सर तल्ख़ का उपयोग जीवन की चुनौतियों की कड़वाहट को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह हृदयविदारक, निराशा और मानव अस्तित्व के साथ आने वाले अनिवार्य दुखों के बारे में कविताओं में आता है।

तल्ख़ जीवन की कड़वाहट को दर्शाता है, जो मानव भावनाओं की गहराई की याद दिलाता है।