Meaning of

दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ

dard-e-gham-e-hijraan • درد غم ہجراں

वियोग के दुःख का दर्द

pain of the sorrow of separation

ہجر کے غم کا درد

Persian

आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ — Salman ashhadi sahil

यह वाक्यांश वियोग के दौरान अनुभव की गई भावनाओं की परतदार जटिलता को पकड़ता है। यह हानि के तीव्र दर्द को अनुपस्थिति के गहरे दुःख के साथ जोड़ता है, एक गहन भावनात्मक परिदृश्य बनाता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग वियोग के कारण उत्पन्न गहन भावनात्मक उथल-पुथल में उतरने के लिए करते हैं। यह लालसा के हृदयविदारक और प्रिय से अलग होने के गहरे दुःख को जागृत करता है।

दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ वियोग के कालातीत दर्द को समेटे हुए है, जो कविता में एक सार्वभौमिक विषय है।