Meaning of

दस्त-बरदार

dast-bardaar • دست بردار

त्याग करने वाला; छोड़ने वाला

one who gives up; one who relinquishes

چھوڑنے والا; دستبردار ہونے والا

Persian

इश्क़ वो दरया है जिस के दो नहीं चार साहिल हैं दस्त-बरदारी, अरूसी, बेवफ़ाई ,वफ़ादारी — A R Sahil "Aleeg"
वास्ते दस्त-बरदारी मुझ से, दिन भी चुना तो क्या वो बनी फ़रवरी चौदह को किसी ग़ैर की दुल्हन — A R Sahil "Aleeg"

‘दस्त-बरदार’ शब्द त्याग और समर्पण की भावना को दर्शाता है। मूल रूप में यह छोड़ने की क्रिया को इंगित करता है, अक्सर भारी मन से। कविता में इस शब्द का प्रयोग बलिदान, बोझों के मीठे-तीखे त्याग और स्वीकृति की मौन गरिमा की खोज के लिए किया गया है।

कवि अक्सर 'दस्त-बरदार' का उपयोग उन पात्रों को चित्रित करने के लिए करते हैं जो अपने भाग्य को गरिमा के साथ स्वीकार करते हैं। यह प्रतिरोध के शब्दों के विपरीत है, समर्पण में निहित गरिमा को उजागर करता है। यह खोए हुए प्रेम या स्थगित सपनों के बारे में छंदों में पसंदीदा है।

कविता में, 'दस्त-बरदार' छोड़ने में पाई जाने वाली शक्ति की कोमल याद दिलाता है। यह दिल की मौन सहनशीलता को संबोधित करता है।