Meaning of

पामाल

paamaal • پامال

रौंदा हुआ; थका हुआ; दबा हुआ

trampled; worn out; downtrodden

پامال; تھکا ہوا; دبایا ہوا

Persian

मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है — Ahmad Faraz
मेरे होंठों के सब्र से पूछो उस के हाथों से गाल तक का सफ़र — Mehshar Afridi
अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते उस का नंबर है मगर कॉल नहीं कर सकते — Nadir Ariz
हम अगर सब्र में रहते हैं तो क्या कुछ भी नहीं जाने वालो कभी आ देखो बचा कुछ भी नहीं — Unknown
इश्क़ में जी को सब्र ओ ताब कहाँ उस से आँखें लड़ीं तो ख़्वाब कहाँ — Meer Taqi Meer
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता — Parveen Shakir
उस गली ने ये सुन के सब्र किया जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं — Jaun Elia
कहीं ये सब्र खा जाए न हम को किसी के दुख समेटे फिर रहे हैं — Rohit Gustakh
वहशत के कारखाने से ताज़ा ग़ज़ल निकाल ऐ सब्र के दरख़्त मेरा मीठा फल निकाल — Ammar Iqbal
भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ' — Dushyant Kumar

यह शब्द किसी ऐसी वस्तु या व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जिसे बार-बार दबाया या उपेक्षित किया गया हो। कविता में, यह जीवन के संघर्षों और थकान का प्रतीक है, जो परिस्थितियों से थक जाने की भावना को पकड़ता है।

कवि अक्सर 'पामाल' का उपयोग दबे-कुचले या थके हुए आत्मा की दशा को वर्णित करने के लिए करते हैं। यह ताजगी या जीवन्तता को दर्शाने वाले शब्दों के विपरीत होता है, निराशा की गहराई को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'पामाल' जीवन के निरंतर बोझ की एक मार्मिक याद दिलाता है।