Meaning of

बज़्म-ए-जानाँ

bazm-e-jaanan • بزم جاناں

प्रियजनों की सभा; प्रेमियों की महफ़िल

gathering of beloveds; assembly of lovers

محبوبوں کی محفل; عاشقوں کی مجلس

Persian

न पहला था न हूँ मैं आख़िरी ही बज़्मे-जानाँ में मगर मैं चाहता था सिलसिला मुझ पे रुका होता — Mohit Dixit

बज़्म-ए-जानाँ एक अंतरंग सभा की छवि को उभारता है, जो स्नेह और लालसा से भरी होती है। कविता में, यह आत्माओं के मिलन का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ प्रेम और सौंदर्य का उत्सव प्रियजनों के घेरे में मनाया जाता है।

कवि बज़्म-ए-जानाँ का उपयोग संगति की गर्माहट और साझा क्षणों की सुंदरता को उभारने के लिए करते हैं। यह प्रेमियों की आदर्श सभा या समान विचारधारा वाले आत्माओं की आध्यात्मिक सभा का प्रतीक हो सकता है।

बज़्म-ए-जानाँ प्रेम की एकता का उत्सव है, हृदय के क्षेत्र में एक प्रिय सभा।