Meaning of

बरहमी

barhmi • برہمی

क्रोध; रोष

anger; wrath

غصہ; قہر

Persian

यूँँ तो हँस हँस के बातें करता है सब से वो
उस का अंदाज़-ए-बरहमी हमारे हक़ में है

1

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अभी से मेरे रफ़ूगर के हाथ थकने लगे
अभी तो चाक मिरे ज़ख़्म के सिले भी नहीं

ख़फ़ा अगरचे हमेशा हुए मगर अब के
वो बरहमी है कि हम से उन्हें गिले भी नहीं

29

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ऐ आसमाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी
हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया

21

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ऐ आ
समाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी
हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया

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यूँँ तो हँस हँस के बातें करता है सब से वो
उस का अंदाज़-ए-बरहमी हमारे हक़ में है

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अभी से मेरे रफ़ूगर के हाथ थकने लगे
अभी तो चाक मिरे ज़ख़्म के सिले भी नहीं

ख़फ़ा अगरचे हमेशा हुए मगर अब के
वो बरहमी है कि हम से उन्हें गिले भी नहीं

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'बरहमी' शब्द तीव्र क्रोध या निराशा की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर विश्वासघात या अन्याय से उत्पन्न होने वाली उथल-पुथल भरी भावनाओं को दर्शाता है।

कवि 'बरहमी' का उपयोग आंतरिक संघर्ष और भावनात्मक उथल-पुथल के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। इसे अक्सर शांति या शांति के साथ विपरीत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

कविता में, 'बरहमी' मानव भावना के कच्चे, बिना छाने हुए सार को पकड़ता है।