Meaning of

बहिश्त

behisht • مکیں

स्वर्ग; जन्नत; आनंद

paradise; heaven; bliss

جنت; بہشت; مسرت

Persian

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी — Jaan Nisar Akhtar
नमकीं गोया कबाब हैं फीके शराब के बोसा है तुझ लबाँ का मज़े-दार चटपटा — Abroo Shah Mubarak
दाग होंगे चेहरों पर जिन के, लोग वो सारे चाँद बन के चमकेंगे, रोज़ आसमानों में — Prit
इबलीस जैसे सज्दे अदा कर के रात दिन चाहत शजर के दिल में हैं देखो बहिश्त की — Shajar Abbas
ये शहर आम सा ही शहर है बहिश्त नहीं बस इक अज़ीज़ रहा करता था यहाँ मेरा — Mohit Dixit
बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँँ कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर — Allama Iqbal
कल राह में चमकेंगे तेरी रौशनी बनकर ये मशवरे माँ-बाप के बेकार नहीं हैं — Shakir Dehlvi
जब तलब है बहिश्त की तो फिर दिल की इस्लाह क्यूँ नहीं करता — Taufique Habib
तेरे बग़ैर गवारा नहीं बहिश्त मुझे मैं पुल सिरात पे बैठा हूँ इंतिज़ार में हूँ — Nirmal Nadeem
हसीन लोग अगर बे-वफ़ा नहीं होते तो सारी दुनिया क़सम से बहिश्त बन जाती — Shajar Abbas

बहिश्त शब्द एक दिव्य स्वर्ग की छवि प्रस्तुत करता है, एक ऐसा स्थान जो परम आनंद और शांति से भरा है। कविता में, यह अक्सर अप्राप्य का प्रतीक होता है, एक ऐसा स्वप्नलोक जो आकर्षक और दूरस्थ दोनों है।

कवि अक्सर 'बहिश्त' का उपयोग एक आदर्श दुनिया की लालसा व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जीवन की कठोर वास्तविकताओं के विपरीत होता है, जो परम शांति और संतोष का रूपक बनता है।

काव्य जगत में, 'बहिश्त' परम आकांक्षा का प्रतीक बना रहता है। यह इच्छा और संतोष की प्रकृति पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।