Meaning of

बार-ए-ग़म

baar-e-gham • رہ عشق

दुःख का बोझ; ग़म का भार

burden of sorrow; weight of grief

غم کا بوجھ; دکھ کا وزن

Persian

ग़ुबार-ए-ग़म नज़र से छट रहा है
बहुत दिन बा'द आया ईद का दिन

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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे

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दुबारा इश्क़ करना है किसी से
मगर डर है दुबारा कट गया तो

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कर लूँ मैं दुबारा इश्क़ ये मजाल भी नहीं
तू ने मुझ को छोड़ा हैं मुझे मलाल भी नहीं

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मैं उस के हिज्र में पागल भी हो सकता था यारो
मगर मैं ने दुबारा इश्क़ करना ठीक समझा

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ग़ुबार-ए-ग़म नज़र से छट रहा है
बहुत दिन बा'द आया ईद का दिन

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ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे
बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे

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यह वाक्यांश उस भारीपन और भावनात्मक बोझ को दर्शाता है जो दुःख जीवन में लाता है। कविता में, यह अक्सर गहरे, अटल बोझ का प्रतीक होता है जो गहन हानि या लालसा के साथ आता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग दुःख की अटल प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर क्षणिक खुशी के क्षणों के साथ विपरीत किया जाता है, जो ग़म की स्थायी उपस्थिति को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'बार-ए-ग़म' मानव दुःख के स्थायी भार का प्रमाण है।