Meaning of

बार-ए-ग़म

baar-e-gham • رہ عشق

दुःख का बोझ; ग़म का भार

burden of sorrow; weight of grief

غم کا بوجھ; دکھ کا وزن

Persian

ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक पर उन को मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे — Javed Akhtar
कर लूँ मैं दुबारा इश्क़ ये मजाल भी नहीं तू ने मुझ को छोड़ा हैं मुझे मलाल भी नहीं — Danish Balliavi
ग़ुबार-ए-ग़म नज़र से छट रहा है बहुत दिन बा'द आया ईद का दिन — shampa andaliib
दुबारा इश्क़ करना है किसी से मगर डर है दुबारा कट गया तो — ABhishek Parashar
मैं उस के हिज्र में पागल भी हो सकता था यारो मगर मैं ने दुबारा इश्क़ करना ठीक समझा — ABhishek Parashar

यह वाक्यांश उस भारीपन और भावनात्मक बोझ को दर्शाता है जो दुःख जीवन में लाता है। कविता में, यह अक्सर गहरे, अटल बोझ का प्रतीक होता है जो गहन हानि या लालसा के साथ आता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग दुःख की अटल प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसे अक्सर क्षणिक खुशी के क्षणों के साथ विपरीत किया जाता है, जो ग़म की स्थायी उपस्थिति को उजागर करता है।

कविता की दुनिया में, 'बार-ए-ग़म' मानव दुःख के स्थायी भार का प्रमाण है।