Meaning of

बे-ज़ार

be-zaar • طرفہ

उदासीन; थका हुआ

disinterested; weary

بے دل; تھکا ہوا

Persian

ऐ शख़्स मैं तेरी जुस्तुजू से बे-ज़ार नहीं हूँ थक गया हूँ — Jaun Elia
आसाँ है मिट्टी से मिट्टी पे मिट्टी लिखना मुश्किल है इक-तरफ़ा चाहत में चिट्ठी लिखना — ZafarAli Memon
दोनों हैं ख़ामोश, के शायद, दोनों जानिब इकतरफ़ा है छोड़ो अपने हाल पे इनको, समझो साहिब! इकतरफ़ा है — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
बे-ज़ारी से बू ना आए तो फिर आँसू चख के देख चारा-गर बोला रोने की अपनी लज़्ज़त होती है — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
उस की जानिब से भी चाहा है बराबर ख़ुद को मैं ने इक-तरफ़ा मुहब्बत तो कभी की ही नहीं — Idris Babar
मुहब्बत एक तरफ़ा है मुहब्बत से वो हारेगा ज़रा तुम देखना दानिश वो ख़ुद को ख़ुद से मारेगा — Danish Balliavi
एक-तरफ़ा था मेरा प्यार मगर पूरी शिद्दत से प्यार करता रहा — Rohit tewatia 'Ishq'

मूल रूप में, 'बे-ज़ार' एक थकान या उदासीनता की भावना को व्यक्त करता है, जो अक्सर एकरसता या असंतोष से उत्पन्न होती है। कविता में, यह शब्द एक भावनात्मक थकान का सार पकड़ता है जो शारीरिक थकान से परे है, एक गहरे अस्तित्वगत ऊब को छूता है।

'बे-ज़ार' का उपयोग कवि गहरे मोहभंग की भावना व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अस्तित्वगत भय, इच्छाओं की निरर्थकता, या जीवन की एकरसता की थीमों की खोज करने वाले छंदों में प्रकट होता है।

कविता की दुनिया में, 'बे-ज़ार' एक शाश्वत थकान को जागृत करता है, जीवन के चक्रों के प्रति एक शांत समर्पण।