Meaning of

बै'अत

bai'at • بیعت

प्रतिज्ञा; निष्ठा

pledge; allegiance

عہد; وفاداری

Arabic

फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत
फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो

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कुछ तबीयत में उदासी भी हुआ करती है
हर कोई इश्क़ का मारा हो, ज़रूरी तो नहीं

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हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे!

मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!

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तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
वो सोचता है बहुत और बोलता कम है

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मुझे ये डर है तेरी आरज़ू न मिट जाए
बहुत दिनों से तबीअत मिरी उदास नहीं

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ज़रा सा ग़म हुआ और रो दिए हम
बड़ी नाज़ुक तबीअत हो गई है

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हम-रही की बात मत कर इम्तिहाँ हो जाएगा
हम सुबुक हो जाएँगे तुझ को गिराँ हो जाएगा

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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

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फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत
फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

25

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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

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'बै'अत' एक गंभीर वादा या प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो अक्सर आध्यात्मिक या राजनीतिक प्रकृति का होता है। कविता में, यह निष्ठा और उन गहरे बंधनों का प्रतीक हो सकता है जो व्यक्तियों को कारणों या विश्वासों से जोड़ते हैं।

कवि 'बै'अत' का उपयोग भक्ति और निष्ठा के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर आध्यात्मिक जागृति या राजनीतिक निष्ठा के संदर्भों में प्रकट होता है।

'बै'अत' में, कवि प्रतिबद्धता की एक गहन अभिव्यक्ति पाते हैं, जो हमें हमारी गहरी मान्यताओं से जोड़ने वाले बंधनों पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं।