Meaning of

भेष

bhes • بھیش

वेश; पोशाक; रूप

disguise; attire; appearance

بھیس; لباس; صورت

Sanskrit

भेस क्या क्या न ज़माने में बनाए हम ने एक चेहरे पे कई चेहरे लगाए हम ने — Sulaiman Areeb
नहीं तू नहीं शेफ इस देस में रे चिड़ैया दरिंदे हैं इंसान के भेस में रे चिड़ैया — Irshad Siddique "Shibu"
मारना रावण को हर दम ही सरल है जो विभीषण साथ हो लंका दहन में — Mukesh Guniwal "MAhir"
बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब' तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं — Mirza Ghalib
जान रहे थे भीष्म तभी तो चिंतित थे जिस के ख़ेमे में कान्हा हो, जीतेगा — Gaurav Singh
न जाने भेस में वो किस के डस ले वो नागिन इच्छाधारी हो गई है — Meem Maroof Ashraf
हर मोड़ पे दुनिया में ज़रा चलना सँभल कर शैतान यहाँ घूमते हैं भेस बदल कर — Arbab Shaz

मूल रूप में 'भेष' का अर्थ है वह बाहरी रूप या पोशाक जिसे कोई अपनाता है। कविता में, यह शब्द अक्सर पहचान और परिवर्तन की गहराईयों में उतरता है, यह दर्शाते हुए कि कैसे बाहरी परिवर्तन आंतरिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित या छुपा सकते हैं।

'भेष' का उपयोग कवि अक्सर छद्म और प्रकट होने के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह समाज में लोग जो मुखौटे पहनते हैं या नई पहचान अपनाने की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक हो सकता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'भेष' पहचान की तरलता और उन परतों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है जिन्हें हम प्रकट या छुपाना चुनते हैं।