Meaning of

लजवन्ती

lajavantee • لجوانتی

संकोची; संवेदनशील

shy; sensitive

شرمیلی; حساس

Sanskrit

तुम अब तक कसमसाते से हो यूँँ जैसे कि लजवन्ती कोई नज़रों से कमसिन जिस्म को सहला गया था क्या — Nityanand Vajpayee

'लजवन्ती' अपने सार में संकोच और संवेदनशीलता की नाजुक प्रकृति को पकड़ता है। कविता में, इसका उपयोग अक्सर एक कोमल आत्मा की छवि को जगाने के लिए किया जाता है, जो छुई-मुई के पौधे के समान होती है, जो हल्के से छूने पर मुरझा जाती है, और भोलापन और मासूमियत का प्रतीक होती है।

कवि 'लजवन्ती' का उपयोग मासूमियत और नाजुकता की छवियों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो कोमल भावनाओं की सुंदरता और भोलापन में पाई जाने वाली शांत शक्ति को सामने लाता है।

लजवन्ती संवेदनशीलता की शांत शक्ति को फुसफुसाती है, कोमलता में शक्ति की एक कोमल याद दिलाती है।