Meaning of

शब-ए-हिज्राँ

shab-e-hijraan • شب ہجراں

वियोग की रात; तड़प की रात

night of separation; night of longing

جدائی کی رات; تڑپ کی رات

Persian

शब-ए-हिज्राँ में गुज़री उम्र है सारी
नहीं मालूम मुझ को शहर ये क्या है

कि दिल की बात काग़ज़ पर सजाता हूँ
नहीं मालूम मुझ को बहर ये क्या है

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शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी
ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है

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शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर
कोई फ़ानूस रौशन है ख़मोशी से मेरे अंदर

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ये शब-ए-हिज्राँ है तो आप पे वाजिब है शजर
हिज्र-ए-महबूब में गिर्या करो सीना पीटो

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शब-ए-हिज्राँ में गुज़री उम्र है सारी
नहीं मालूम मुझ को शहर ये क्या है

कि दिल की बात काग़ज़ पर सजाता हूँ
नहीं मालूम मुझ को बहर ये क्या है

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शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी
ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है

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यह वाक्यांश प्रिय से अलग बिताई गई रात के दौरान अनुभव किए गए गहरे दुःख और तड़प को समाहित करता है। यह वियोग के साथ आने वाले भावनात्मक उथल-पुथल और तड़प के सार को पकड़ता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग वियोग के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमियों के बीच भावनात्मक दूरी का रूपक है। यह आंसुओं और मौन प्रार्थनाओं से भरी एकांत रात की छवि को जागृत करता है।

शब-ए-हिज्राँ प्रेम की परीक्षाओं की एक मार्मिक याद दिलाता है। यह दिल की गहरी तड़प को संबोधित करता है।