Meaning of

शाख़-ए-गुलाब

shaakh-e-gulaab • شاخ گلاب

गुलाब की शाखा

rose branch

شاخ گلاب

Persian

तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई — Bashir Badr
वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे — Ahmad Faraz

शाख़-ए-गुलाब गुलाब की शाखा की नाजुक सुंदरता और नाजुकता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर कृपा, सुंदरता और सुंदरता की क्षणभंगुर प्रकृति का प्रतीक है।

कवि शाख़-ए-गुलाब का उपयोग क्षणभंगुर सुंदरता और प्रकृति की सुंदरता के विषयों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह प्रेम की नाजुकता या खुशी के क्षणभंगुर क्षणों का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है।

शाख़-ए-गुलाब हमें सुंदरता की क्षणभंगुर प्रकृति और नाजुकता में निहित सुंदरता की याद दिलाता है। यह जीवन के नाजुक संतुलन के सार को पकड़ता है।