Meaning of

शाम-ए-ग़म

shaam-e-gham • شام غم

दुःख की शाम; ग़म की सांझ

evening of sorrow; dusk of grief

غم کی شام; دکھ کا وقت

Persian

शाम-ए-ग़म करवट बदलता ही नहीं वक़्त भी ख़ुद्दार है तेरे बग़ैर — Shakeel Badayuni

यह वाक्य उस समय को दर्शाता है जब दिन का उजाला ढलने लगता है, जैसे कि खुशी का अंत और उदासी का आगमन। कविता में, यह अकेलेपन और चिंतन की भावना को पकड़ता है, जहां दिल एक कोमल, फिर भी गहरी उदासी में डूब जाता है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग आत्मनिरीक्षण के दृश्य को स्थापित करने के लिए करते हैं। यह वह समय होता है जब यादें फिर से उभरती हैं, और दिल खोए हुए प्रेम या अधूरी इच्छाओं पर विचार करता है। शाम भावनाओं के गोधूलि का रूपक बन जाती है।

सांझ की शांति में, दिल अपनी आवाज़ पाता है, जो लालसा और स्मरण की भाषा में बोलता है।