Meaning of

शाम-ए-बला

shaam-e-bala • شام بلا

आपदा की शाम; विपत्ति की संध्या

evening of calamity; dusk of disaster

بلا کی شام; آفت کی شام

Persian

हम को भी तो गाँव की शाम बुलाती है लेकिन रोज़ी की बेड़ी कैसे खोले — Meem Alif Shaz
हम को भी गाँव की वो शाम बुलाती है शाज़ पर ये मजबूरियाँ घर जाने नहीं देती है — Meem Alif Shaz

यह वाक्यांश एक ऐसी शाम की जीवंत तस्वीर खींचता है जो आसन्न कयामत से ढकी होती है। यह तूफान से पहले की शांति को पकड़ता है, एक ऐसा क्षण जो प्रत्याशा और भय से भरा होता है, जहाँ संध्या की सुंदरता आपदा की आशंका से रंगी होती है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग आसन्न त्रासदी की भावना को उभारने के लिए करते हैं। यह जीवन के उन क्षणों के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है जहाँ सुंदरता और खतरा सह-अस्तित्व में होते हैं, शांति और अराजकता के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करते हैं।

शाम-ए-बला प्रकाश और छाया के बीच के नाजुक नृत्य को समाहित करता है, जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता की एक मार्मिक याद दिलाता है।