Meaning of

शाज़

shaaz • شاذ

दुर्लभ; असामान्य

rare; uncommon

نایاب; غیر معمولی

Arabic

बस फ़क़त तलब थी इक शख़्स की मुझे यार 'शाज़ आसिम' दिल तो ग़ज़ाल है — P A Shaaz
क्या हुआ टूट गया है जो तिरा दिल भी शाज़ जो कभी टूटे नहीं क्या वो भी दिल होता है — Meem Alif Shaz
पाँव से काँटा जब हम निकालेंगे 'शाज़' लोग आएँगे तब देखने के लिए — Meem Alif Shaz
कामयाबी की तरफ़ क्यूँ नहीं बढ़ते हो शाज़ कौन से ख़ौफ़ की ज़ंजीर पहन ली तुम ने — Meem Alif Shaz
उस को बज़्म में ज़लील कर के ख़ुश न हो कि शाज़ कपड़े तिरे भी फटे हैं खींचने में यूँँ उसे — Meem Alif Shaz
कभी ये शाज़-ओ-नादिर थे रहीं ख़ुश-फ़हमियाँ क्या क्या मुसलसल हादसे कोई गुमाँ रहने नहीं देते — Miyan Umar
तुम सिकंदर भी होते तो क्या करते शाज़ मौत के सामने कर भी क्या सकते हो — Meem Alif Shaz
अपने गुनाहों की सज़ा इतनी मिली है हम को शाज़ हर रोज़ खाते हैं दवाई फिर भी हम हँसते नहीं — Meem Alif Shaz
अपने हर ज़ख़्म की तस्वीर बनाई थी शाज़ पर ज़माना तो ज़माना है न देखी उस ने — Meem Alif Shaz
उस का मुझ को छोड़ने का फ़ैसला सही है 'शाज़' जो वो चाहती थी मुझ में बात वो है ही नहीं — Meem Alif Shaz

'शाज़' का मूल अर्थ कुछ दुर्लभ या आम न होने का है। कविता में, यह शब्द अक्सर अद्वितीयता और मूल्यवानता की भावना को प्रकट करता है, जो दुर्लभता में सुंदरता को उजागर करता है।

'शाज़' का उपयोग कवि दुर्लभ सुंदरता या भावनाओं का वर्णन करने के लिए करते हैं। इसे एक अद्वितीय क्षण या भावना को उजागर करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। अक्सर साधारण के विपरीत, यह विषय को विशिष्टता के क्षेत्र में उठाता है।

कविता में, 'शाज़' असाधारण का प्रतीक बन जाता है, यह याद दिलाता है कि दुर्लभता अक्सर सबसे गहरी आकर्षण रखती है।