Meaning of

शिकवा

shikwa • شکوہ

शिकायत; गिला; दुखभरा उलाहना

complaint; grievance; lament

شکایت; گلہ; دکھ بھرا شکوہ

Arabic

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है — Jaun Elia
दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते अब कोई शिकवा हम नहीं करते — Jaun Elia
बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं — Shariq Kaifi
'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया — Shaad Arfi
तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है — Aziz Nabeel
वैसे एक शिकवा था तुम सेे अच्छा छोडो ईद मुबारक — Zubair Ali Tabish
कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से — Waseem Barelvi
अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर' एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे — Majeed Akhtar
पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा — Rais Amrohvi
फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक — Neeraj Neer

शिकवा का मूल अर्थ असंतोष या शिकायत है, जो अक्सर किसी प्रिय या उच्च शक्ति की ओर निर्देशित होती है। कविता में, यह गहरे भावनात्मक उथल-पुथल और अधूरी इच्छाओं को व्यक्त करने का माध्यम बन जाता है, जो लालसा और दुःख की तस्वीर पेश करता है।

कवि अक्सर 'शिकवा' का उपयोग भाग्य या दूर के प्रिय के खिलाफ दिल की गहरी शिकायतों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत और दिव्य के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है, जिससे कवि अन्याय और लालसा के विषयों का अन्वेषण कर सकते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'शिकवा' मानवीय स्थिति की एक मार्मिक अभिव्यक्ति बन जाता है, जहाँ लालसा और विलाप आपस में गुँथे होते हैं।