Meaning of

शिकोह

shikoh • شکوہ

वैभव; भव्यता

splendor; grandeur

شان و شوکت; عظمت

Persian

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है — Jaun Elia
दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते अब कोई शिकवा हम नहीं करते — Jaun Elia
बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं — Shariq Kaifi
'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया — Shaad Arfi
तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है — Aziz Nabeel
वैसे एक शिकवा था तुम सेे अच्छा छोडो ईद मुबारक — Zubair Ali Tabish
कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से — Waseem Barelvi
अब साथ नहीं है भी तो शिकवा नहीं 'अख़्तर' एहसान भी मुझ पर मिरे भाई के बहुत थे — Majeed Akhtar
पहले ये शुक्र कि हम हद्द-ए-अदब से न बढ़े अब ये शिकवा कि शराफ़त ने कहीं का न रखा — Rais Amrohvi
फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक — Neeraj Neer

शिकोह भव्य सुंदरता और विस्मयकारी उपस्थिति का आभास कराता है। कविता में, यह अक्सर प्रकृति की भव्यता या मानव आत्मा की महानता का प्रतीक होता है, जो भव्यता के सार को पकड़ता है।

कवि 'शिकोह' का उपयोग शाही परिदृश्यों की छवियों को उभारने या किसी व्यक्ति के गरिमामय आभा का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह सादगी के विपरीत है, असाधारण और उदात्त को उजागर करता है।

शिकोह शाश्वत आकर्षण का प्रतीक है। यह पाठक को साधारण के परे की भव्यता को देखने के लिए आमंत्रित करता है।