Meaning of

शौक़-ए-मंज़िल

shauq-e-manzil • شوق منزل

मंज़िल की चाह; लक्ष्य की लालसा

desire for destination; longing for the goal

منزل کی چاہ; مقصد کی آرزو

Persian

शौक़-ए-मंज़िल में चलता रहता हूँ पड़ता रहता है आबला दिल में — Shadab Shabbiri

यह वाक्यांश एक गहरी चाह और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यह मानव आत्मा की निरंतर लक्ष्य की खोज को व्यक्त करता है, जो आशा और दृढ़ संकल्प से भरी यात्रा का सार है।

कवि अक्सर इस वाक्यांश का उपयोग उस आंतरिक प्रेरणा को दर्शाने के लिए करते हैं जो व्यक्तियों को उनके सपनों की ओर ले जाती है। इसे संतोष के विपरीत दिखाया जा सकता है, जो आकांक्षा और संतोष के बीच के तनाव को उजागर करता है।

कविता में, 'शौक़-ए-मंज़िल' जीवन की यात्रा का रूपक बन जाता है, जहाँ मार्ग उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि मंज़िल।