Meaning of

सर-ए-बाज़ार

sar-e-bazaar • سر بازار

बाज़ार में; सार्वजनिक रूप से

in the marketplace; publicly

بازار میں; عوامی طور پر

Persian

सर-ए-बाज़ार मैं उस की मोहब्बत को न बेचूँगा किसी नाज़ुक परी के जिस्म से कपड़ा न खेचूँगा — ALI ZUHRI
कुछ शिकायत है तो घर आओ कभी फ़ुर्सत में मैं तमाशा सर-ए-बाज़ार नहीं कर सकता — Shakir Dehlvi
हुस्न को ले के खड़ा हूँ सर-ए-बाज़ार शजर मिस्ल-ए-यूसुफ़ कोई मुझ को भी ख़रीदार मिले — Shajar Abbas
अपनी बेटी को बताओ कि कनीज़-ए-ज़हरा बे रिदा बर सर-ए-बाज़ार नहीं फिरती हैं — Shajar Abbas
खा के चक्कर गिर गए थे कल सर-ए-बाज़ार में और तब से होश में हम आ न पाए आज तक — Pushpendra Panchal
झूठ कहते हैं यहाँ बाजार में बिकता नहीं कुछ बेसहारा को सर-ए-बाज़ार बिकते देखा मैं ने — Sandeep dabral 'sendy'
मुझे तो एक ये भी काम करना था सर-ए-बाज़ार कुछ नीलाम करना था — Dileep Kumar
सर-ए-बाज़ार करते हैं नुमाइश अपने ज़ख़्मों की कभी उस ने कहा था दिल को हल्का क्यूँँ नहीं करते — sahil

'सर-ए-बाज़ार' शब्द एक बाज़ार के चहल-पहल और खुले वातावरण को दर्शाता है, जहाँ सब कुछ दिखाई देता है और उजागर होता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं की नाज़ुकता और खुलेपन का प्रतीक होता है, जो सबके सामने प्रकट होती हैं।

सार्वजनिक टकराव या घोषणा के दृश्यों को चित्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है। अक्सर निजी, छिपी हुई भावनाओं के विपरीत होता है। अपने सच्चे स्व को उजागर करने के साहस या लापरवाही को उजागर करता है।

सर-ए-बाज़ार सार्वजनिक नाज़ुकता का सार पकड़ता है, जो काव्यात्मक संभावनाओं से भरपूर है।