Meaning of

सिपर

sipar • سپر

ढाल; सुरक्षा

shield; protection

ڈھال; حفاظت

Persian

कह दो अगर तक्सीम सरमाया हो मेरे इश्क़ का सब छोड़ो बस स्पर्श हाथों का अदा कर दोगी ना — Shubh Mathur
आतिश-ए-इश्क़ में जले दिल को आओ मिल कर सुपुर्द-ए-ख़ाक करें — Shajar Abbas
क्यूँँ है तेग़ लफ़्ज़ों की बात-बात में शामिल ख़ामुशी से मुझ को भी बे-सिपर करे कोई — kapil verma
सुपुर्द-ए-खाक़ कर के इस जुनून-ए-शायरी को अब ये सोचा है मुहब्बत से किनारा कर लिया जाए — Sagheer Lucky
जो नहीं किया उस का इत्तिहाम मुझ पर ख़ुद-सुपुर्दगी की मुझ को जज़ा मिली है — Sibgatullah Anwer
ख़ुदा ही है, कि जो सीना सिपर पहाड़ों के जिगर को चीर के दरिया निकाल देता है — Shadab Shabbiri

'सिपर' का मूल अर्थ युद्ध में उपयोग की जाने वाली ढाल है, जो सुरक्षा और रक्षा का प्रतीक है। कविता में, यह अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर भावनात्मक या आध्यात्मिक सुरक्षा का प्रतीक बन जाता है, जीवन की कठिनाइयों के खिलाफ एक अवरोध।

'सिपर' का उपयोग कवि अक्सर सुरक्षा और दृढ़ता के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह किसी प्रियजन का प्रतीक हो सकता है जो ढाल का काम करता है, या वह आंतरिक शक्ति जो आत्मा की रक्षा करती है। यह शब्द असुरक्षा के विपरीत है, उजागर और सुरक्षा के बीच के तनाव को दर्शाता है।

'सिपर' सुरक्षा की स्थायी मानव इच्छा और आंतरिक दृढ़ता की काव्यात्मक खोज का प्रमाण है।