Meaning of

सुरख़-रू

surkh-roo • سرخ رو

लाल चेहरा; सफल; सम्मानित

red-faced; successful; honored

سرخ چہرہ; کامیاب; معزز

Persian

बदन का सारा लहू खिंच के आ गया रुख़ पर वो एक बोसा हमें दे के सुर्ख़-रू है बहुत — Zafar Iqbal
ख़ुद को ऊपर उठा उसे न गिरा सुर्ख़-रू हो के इंतिक़ाम ले दोस्त — Dharmesh Solanki
सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बा'द — Syed Gulam Mohammad Mast Kalkattvi
सर कटा कर ही सुर्ख़-रूई है इश्क़ भी कर्बला का मैदाँ है — Meem Maroof Ashraf

'सुरख़-रू' शब्द एक ऐसे चेहरे की छवि प्रस्तुत करता है जो सफलता या सम्मान से लाल हो गया हो। अपने मूल अर्थ में, यह चेहरे की लालिमा को दर्शाता है, जो अक्सर विजय या प्रतिष्ठा से जुड़ी होती है। कविता ने इस शब्द को न केवल भौतिक रूप से बल्कि उपलब्धि की आंतरिक चमक और पहचान की गर्मजोशी के प्रतीक के रूप में अपनाया है।

'सुरख़-रू' का उपयोग कवि अक्सर उन पात्रों को चित्रित करने के लिए करते हैं जिन्होंने बड़ी सफलता प्राप्त की हो या जिन्हें सम्मानित किया गया हो। यह उन शब्दों के विपरीत है जो असफलता या अपमान का सुझाव देते हैं। यह शब्द गर्व और संतोष की भावनात्मक स्थिति का वर्णन करने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।

कविता की दुनिया में, 'सुरख़-रू' आत्मा की विजय और पहचान की चमक का प्रतीक है। यह सफलता और सम्मान का उत्सव है।