Meaning of

सू-ए-दार

su-e-daar • سوئے دار

फांसी की ओर

towards the gallows

سوی دار

Persian

मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले — Faiz Ahmad Faiz

'सू-ए-दार' आसन्न विनाश या बलिदान की भावना उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम या सत्य के लिए अंतिम बलिदान का प्रतीक होता है, जहां फांसी का फंदा अटल प्रतिबद्धता की कीमत का रूपक बन जाता है।

कवि 'सू-ए-दार' का उपयोग शहादत और बलिदान के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह किसी के विश्वास या प्रेम के लिए गंभीर परिणामों का सामना करने के साहस को चित्रित कर सकता है।

'सू-ए-दार' प्रेम और सत्य के नाम पर किए गए बलिदानों की एक मार्मिक याद दिलाता है।