Meaning of

सोज़-ए-ग़म

soz-e-gham • سوز غم

दुःख की जलन; पीड़ा

burning of sorrow; anguish

غم کی جلن; کرب

Persian

'देव' अब और ये ग़ज़लें नहीं होंगी हम से सोज़-ए-ग़म है लिखा ऐसा जो मिटाए न बने — Amit Nandan Dev

'सोज़-ए-ग़म' शब्द दुःख की तीव्र, भस्म करने वाली प्रकृति को दर्शाता है। कविता में, यह केवल दुःख की उपस्थिति नहीं है, बल्कि इसकी अग्निमय, परिवर्तनकारी शक्ति है जो उजागर होती है।

कवि 'सोज़-ए-ग़म' का उपयोग भावनात्मक दर्द की गहराइयों में उतरने के लिए करते हैं, इसे अक्सर व्यक्तिगत विकास या कलात्मक सृजन के उत्प्रेरक के रूप में चित्रित करते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'सोज़-ए-ग़म' दुःख को परिवर्तन की जलती हुई शक्ति में बदल देता है।