Meaning of

सौरभ

saurabh • سوربھ

सुगंध; खुशबू

fragrance; aroma

خوشبو; مہک

Sanskrit

दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई
कम किराए पर भी इस
में कौन रहने आएगा

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ये ज़िद बेकार है सौरभ तेरी अब
किसी का रंग उस पे पहले से है

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किसी को वादे देकर के मुकर जाना नहीं सौरभ
किसी को वक़्त देकर के गुज़र जाना नहीं सौरभ

समेटा है तुझे तेरे बिगड़ने पर सदा जिस ने
मेरा कहना वहीं रहना बिखर जाना नहीं सौरभ

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लानत है तुझ पर इक लड़की को नइँ भुला सका 'सौरभ'
तू तो कहता था कितनी आएँगी कितनी जाएँगी

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सुकूँ ये है वो अब भी चाहती है
सितम ये है कई लोगों को 'सौरभ'

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दिल मिरा वो घर है सौरभ ख़ुद-कुशी जिस में हुई
कम किराए पर भी इस
में कौन रहने आएगा

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ये ज़िद बेकार है सौरभ तेरी अब
किसी का रंग उस पे पहले से है

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‘सौरभ’ शब्द एक ऐसी सुगंध का आभास कराता है जो हवा में धीरे-धीरे फैलती है और इंद्रियों को कोमलता से छूती है। कविता में, यह अक्सर उन अदृश्य लेकिन गहराई से महसूस की जाने वाली भावनाओं का प्रतीक होता है, जैसे कोई स्मृति या भावना जिसे पकड़ा नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है।

कवि अक्सर ‘सौरभ’ का उपयोग प्रिय या किसी प्रिय स्मृति की उपस्थिति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह सौंदर्य की क्षणभंगुरता और उसके जीवन को क्षणिक लेकिन गहराई से छूने के तरीके का भी संकेत दे सकता है।

कविता के क्षेत्र में, ‘सौरभ’ जीवन द्वारा प्रस्तुत की गई अमूर्त सुंदरता की याद दिलाता है, अदृश्य लेकिन गहराई से महसूस की जाने वाली एक फुसफुसाहट।