Meaning of

हलक़

halaq • حلق

गला; कंठ; आवाज़ का मार्ग

throat; gullet; passage of voice

گلا; حلق; آواز کا راستہ

Arabic

इसलिए भी अकड़ के बैठा था
वो बुलंदी पे चढ़ के बैठा था

नुक़रई रौशनी के हलक़े में
दिल अँधेरा पकड़ के बैठा था

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हलके फुलके में ले रहे थे मुझे
मेरे हलक़े में आ गए हैं वो

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चीख़ती रहती है दुनिया कि बचाओ! पर मैं
'पूस की रात' के हल्कू-सा पड़ा रहता हूँ

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उन की नज़र ने कैसे हमें नीम-जाँ किया
जाँ तक हलक में आ गई जिस ने बयाँ किया

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फ़राग़-ए-दिल जला दो ग़म बचा के रख
हलक़ से चीख़ना है,दम बचा के रख

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किसे ख़बर थी दरख़्तों का ये कटाव कभी
हमारे हल्क़ा-ए-अहबाब तक भी आएगा

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इसलिए भी अकड़ के बैठा था
वो बुलंदी पे चढ़ के बैठा था

नुक़रई रौशनी के हलक़े में
दिल अँधेरा पकड़ के बैठा था

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हलके फुलके में ले रहे थे मुझे
मेरे हलक़े में आ गए हैं वो

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‘हलक़’ शब्द शरीर के उस अंतरंग स्थान को दर्शाता है जहाँ आवाज़ और सांस मिलते हैं। कविता में, यह अक्सर अभिव्यक्ति की नाजुकता और शक्ति का प्रतीक होता है, जहाँ शब्द जन्म लेते हैं और भावनाएँ मुक्त होती हैं।

कवि अक्सर 'हलक़' का उपयोग संचार और मौन के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह बोलने के संघर्ष या अनकहे शब्दों की सुंदरता को दर्शा सकता है। गला छिपे हुए सत्य के मार्ग का रूपक बन जाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'हलक़' मौन और वाणी के बीच नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।